Saturday, 12 June 2010

अचल होते हुए भी पृथ्‍वी की गति के सापेक्ष सूर्य का प्रभाव पडता है !!

कल के ही लेख को आगे बढाने का प्रयास कर रही हूं , पर एक टिप्‍प्‍णी के कारण शीर्षक में से वैज्ञानिक दृष्टिकोण हटा दिया जा रहा है। जब भी मैं ज्‍योतिष को विज्ञान कहती हूं , उनलोगों को कष्‍ट पहुंचता है , जो मोटे मोटे किताबों में लिखे वैज्ञानिकों खासकर विदेशियों के सिद्धांतों को ही विज्ञान मानते हैं। हमारे पूर्वजों द्वारा परंपरागत अनुभव के आधार पर विकसित किए गए नियमों और खासकर हमारे ऋषि मुनियों के ज्ञान का इनके लिए कोई महत्‍व नहीं। और किसी को कष्‍ट पहुंचे , ऐसा कोई काम मैं नहीं करना चाहती , यदि ज्‍योतिष विज्ञान है , तो आनेवाले दिनों में मेरे पाठकों के समक्ष स्‍वत: सिद्ध हो जाएगा, चाहे इसकी चर्चा शीर्षक में करूं या नहीं , इतना तो मुझे विश्‍वास है।

कल के लेख में मैने समझाया था कि सबों की नजर अपने को स्थिर मानकर ही परिस्थितियों का अवलोकन करती है। इसलिए हमलोग असमान का अवलोकण पृथ्‍वी को स्थिर मानते हुए करते हैं , इसलिए ज्‍योतिष के इस महत्‍वपूर्ण आधार को गलत साबित करना सही नहीं है। बात अवलोकन तक तो ठीक मानी जा सकती है , पर हमारे अवलोकण से उन राशियों या ग्रहों नक्षत्रों का पृथ्‍वी के जड चेतन पर प्रभाव भी पड जाए , यह तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण वालों को तर्कसम्‍मत नहीं लगता। और ज्‍योतिष  तो पृथ्‍वी के सापेक्ष ही सभी राशियों और ग्रहों  के स्‍थान परिवर्तन की चर्चा करता है और उसके हमपर प्रभाव पर बल देता है। जाहिर है , अधिकांश पाठक इस बात को भी स्‍वीकार नहीं कर पाते।

पर इसके लिए भी मेरे अपने तर्क हैं। हमारे सौरमंडल का एक तारा सूर्य लगभग अचल है , हालांकि इधर के कुछ वर्षों में उसकी गति के बारे में भी जानकारी मिली है , पर यह गति बहुत अधिक नहीं है और वास्‍तव में यह पृथ्‍वी की गति के सापेक्ष ही परिवर्तनशील दिखाई देता है। ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में सूर्य प्रतिदिन एक डिग्री खिसक जाता है , जबकि राशि के हिसाब से प्रतिमाह एक नई राशि में प्रवेश करता है। पृथ्‍वी की वार्षिक गति के सापेक्ष ही पंचांगों में सूर्य की स्थिति में प्रतिदिन परिवर्तन देखा जाता है , जबकि दिन भर के 24 घंटों में  सूर्य की स्थिति में कोणिक परिवर्तन पृथ्‍वी की दैनिक गति के कारण ही होता है। सूर्य की ये दोनो गतियां अवास्‍तविक मानी जा सकती हैं , पर इसके फलस्‍वरूप पृथ्‍वी पर दिन भर के 24 घंटों और वर्षभर के 365 दिनों के सूर्य के अलग अलग प्रभाव को स्‍पष्‍टतया देखा जा सकता है।

पृथ्‍वी की वार्षिक गति के कारण सूर्य की स्थिति में होनेवाले परिवर्तन का प्रभाव हम देख पाते हैं। सूर्य तो 12 महीने के 365 दिनों तक एक ही स्‍थान पर है , पर उसके द्वारा पृथ्‍वी के विभिन्‍न हिस्‍सों में कभी सर्दी तो कभी गर्मी .. इस मौसम परिवर्तन का कारण पृथ्‍वी के कारण उसकी सापेक्षिक गति ही तो है। इसी प्रकार पृथ्‍वी की दैनिक गति के कारण सूर्य की स्थिति में होने वाले परिवर्तन को भी हम सहज ही महसूस कर सकते हैं। सवेरे का सूरज , दोपहर का सूरज और शाम के सूरज की गरमी का अंतर सबको पता है यानि कि अवलोकण के समय सूर्य जहां दिखाई देता है , वैसा ही प्रभाव दिखाता है।

अब चूंकि सूर्य का प्रभाव स्‍पष्‍ट है , इसमें हमारा विश्‍वास हैं , अन्‍य ग्रहों का प्रभाव स्‍पष्‍ट नहीं है , इसलिए इसे अंधविश्‍वास मान लेते है। पर एक सूर्य के उदाहरण से ही पृथ्‍वी के सापेक्ष पूरे आसमान और ग्रहों की स्थिति का प्रभाव भी स्‍पष्‍ट हो जाता है।सापेक्षिक गति के कारण होनेवाले इस एक उदाहरण के बाद ज्‍योतिष के इस आधार में कोई कमी निकालना बेतुकी बात होगी। पृथ्‍वी को स्थिर मानते हुए आसमान को 12 भागों में बांटा जाना और उसमें स्थित ग्रह नक्षत्र के प्रभाव की चर्चा करना पूर्ण तौर पर विज्ञान माना जा सकता है , जिसकी चर्चा लगातार होगी।

14 comments:

  1. बढ़िया क्लास चल रही है अगली पोस्ट का इंतजार

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  2. bahut sunder jaankari ke liye
    aapka bahut bahut dhnyvad

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

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  3. विचारणीय....अच्छी जानकारी मिली ..

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  4. ज्योतिष में जहां तक खगोलीय गणनाएं हैं...सुंदर लगती हैं.

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  5. मैं ज्योतिष पर विश्वाश करता हूँ. शायद इसलिए क्योंकि मेरा जन्म रेवती नक्षत्र में हुआ है. मैं ज्योतिष को पुर्णतः विज्ञानं मानता हूँ. जो इसका विरोध करते हैं वो बताएं की उनकी नजर में विज्ञानं किस चिड़िया का नाम है. अपने जो लेखमाला शुरू की है वो मेरे जैसे लोगो के ज्ञान वर्धन के लिए है. आपका धन्यवाद.

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  6. मैं तो ज्योतिष को विज्ञान की ही कड़ी मानती हूँ ..बढ़िया क्लास चल रही है आपकी.

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  7. आप ज्योतिष के बारे में जानकारी देकर एक अच्छा प्रयास करेंगी..

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  8. आईये जानें .... क्या हम मन के गुलाम हैं!

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  9. सार्थक पोस्ट

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  10. ईश्वर करे आप अपने प्रयासों में सफल हों ! हार्दिक शुभकामनायें !

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  11. बढ़िया है..बैठे हैं क्लास में हम भी ..

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  12. संगीता जी बहुत अच्छी जानकारी है । अभी आपके पिछले लेख भी पढने हैं। समय मिलते ही पढूँगी धन्यवाद्

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  13. ज्योतिष का ज्ञान जारी रखिये,सरल रूप से इसका ज्ञान मिलेगा,में तो उत्सुक हूँ,इस विद्या को जानने के लिये ।

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  14. टंगडीमार13 June 2010 at 18:32

    आगया है अब टंगडीमार ले दनादन दे दनादन। दुनिया याद रखेगी। जरा संभलके।

    टंगडीमार

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