Wednesday, 16 June 2010

जन्‍मकुंडली बच्‍चे के जन्‍म के समय का पूरे आसमान का चित्र है !!

कल के आलेख से हमें जानकारी मिली कि आसमान के गोलाकार 360 डिग्री के 12 भाग कर 12 राशियां बना दी गयी है। अभी तक तो आपको इनके नाम भी याद हो गए होंगे। जन्‍मकुंडली में जिस खाने में 1 लिखा होता है , वह मेष राशि का प्रतिनिधित्‍व करता है , जहां 2 लिखा होता है , वह वृष राशि का प्रतिनिधित्‍व करता है , इसी प्रकार जिस खाने में 3 लिखा हो , वह मिथुन , जिस खाने में 4 लिखा हो , वह कर्क , जिस खाने में 5 लिखा हो , वो सिंह , जिस खाने में 6 लिखा हो , वो कन्‍या , जिस खाने में 7 लिखा हो , वह तुला , जिस खाने में 8 लिखा हो , वह वृश्चिक ,जहां 9 लिखा हो , वह धनु , जहां 10 लिखा हो , वह मकर , जहां 11 लिखा हो , वह कुंभ तथा जहां 12 लिखा हो , वह खाना मीन राशि का प्रतिनिधित्‍व करता है। पृथ्‍वी के सापेक्ष सभी ग्रह इन्‍हीं 12 राशियों में घडी के कांटो की दिश्‍श में घूमते हुए दिखाई देते हैं ।

चूंकि किसी व्‍यक्ति की जन्‍मकुंडली उसके जन्‍म के समय आसमान के बारहो राशियों और सभी ग्रहों की स्थिति को दिखलाती है , इसलिए उसमें बारहो राशियों और सारे ग्रहों का उल्‍लेख होगा ही। जन्‍मकुंडली में सभी ग्रहों को एक एक अक्षर में लिखा जाता है। सूर्य के लिए सू , चंद्रमा के लिए चं , बुध के लिए बु , मंगल के लिए मं , शुक्र के लिए शु , बृहस्‍पति के लिए बृ , शनि के लिए श , राहू के लिए रा और केतु के लिए के का प्रयोग किया जाता है। इसलिए जन्‍मकुंडली में बारह खाने के रूप में सभी राशियां तथा किसी न किसी राशि में संक्षिप्‍त रूप में नवों ग्रह दिखाई देंगे। जन्‍मकुंडली में  जिस राशि में सूर्य हो , वह व्‍यक्ति की सूर्य राशि तथा जिस राशि में चंद्र हो , वह व्‍यक्ति की चंद्र राशि होगी । किसी व्‍यक्ति के लग्‍नराशि को जानने के लिए कुंडली चक्र को सीधा रखकर उसके सबसे ऊपर मध्‍य खाने में लिखे अंक को देखना चाहिए।

संलग्‍न चित्र से यह स्‍पष्‍ट हो जाएगा कि किसी की जन्‍मकुंडली में स्थित मध्‍य विंदू हमारी पृथ्‍वी होती है , सबसे ऊपर में मध्‍य का खाना बालक के जन्‍म के समय पूर्वी क्षितिज को दर्शाता है , इसलिए उसमें लिखे अंक वाली राशि ही बालक की लग्‍नराशि होती है। इसके अलावे सबसे नीचे का खाना बालक के जन्‍म के समय पश्चिमी क्षितिज को दर्शाता है । दायीं ओर का खाना जातक की ओर के मध्‍य आकाश तथा तथा बायीं ओर का खाना पृथ्‍वी के उल्‍टी ओर के मध्‍य आकाश को दर्शाता है। इसलिए जन्‍मकुंडली में सबसे ऊपर के मध्‍य वाले खाने में कोई ग्रह दिखाई दें , तो समझना चाहिए कि उस ग्रह का उदय भी बच्‍चे के जन्‍म के साथ ही हो रहा था। इसी प्रकार सबसे नीचे के खाने में कोई ग्रह हो , तो समझना चाहिए कि वह ग्रह बच्‍चे के जन्‍म के समय पश्चिमी क्षितिज पर चमकते हुए अस्‍त होने को था। इसी प्रकार अन्‍य खानों और उनमें स्थित राशियों का भी अर्थ लगाया जा सकता है।



अभी तक की ज्‍योतिषीय जानकारी के बाद पाठकों से यह अपेक्षा रखूंगी कि वो बताएं कि ऊपर दिए गए जन्‍मकुंडली के अनुसार जातक की लग्‍न राशि , सूर्य राशि या चंद्र राशि क्‍या होगी , उसके जन्‍म के समय कौन से ग्रह उदय हो रहे थे , कौन से अस्‍त हो रहे थे और कौन से ग्रह मध्‍य आकाश में चमक रहे थे।                     

20 comments:

  1. ज्योति्ष के विषय में प्रारंभिक जानकारी आवश्यक है।
    इससे पाठकों को सही गलत का फ़ैसला करने में सहुलियत होगी।

    आभार

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  2. सूर्य राशि-कर्क तथा चंद्र राशि-मकर ।
    फिलहाल इतना ही समझा ।

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  3. वाकई आप बहुत अच्छी तरह से समझा रही हैं!

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  4. जो आपसे चैट में ज्योतिष के बारे में आपके पूछे हुये प्रश्नो का मेने उत्तर दिये थे,और जो मुझे शंकायें थी,उसके बारे में लिख रहा हूँ,आपकी दी हुई पत्री में लग्न में कर्क है,क्योकिं इसकी संख्या 4 है,और चन्द्र राशी में मकर है,जिसका उत्तर मेने शनि गलत कहा था,इसकी संख्या 10 है,इसलिये यह मकर हुआ,और सुर्य राशी में भी मकर है,जो मेने बुध कहा,जो कि उदय हो रहा है,और चन्द्र राशी में शनि है,आपने मध्य आकाश में व्रहस्पत बताया था,जो में उपर मध्य में समझ रहा था,और विपरीत दिशा के आकाश में मंगल है ।

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  5. बहुत उपयोगी पोस्ट।
    कर्क लग्न।
    कर्क सूर्य राशि
    मकर चंद्र राशि।

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  6. एक संशोधन सुर्य भी उदय हो रहा है,और चन्द्र अस्त हो रहा है ।

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  7. शनि भी अस्त हो रहा है ।

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  8. दी गयी कुण्डली में चन्द्र राशि मकर और सूर्य राशि कर्क तो स्पष्ट है.पूर्व क्षितिज पर गुरु और पश्चिम क्षितिज पर चन्द्र और शनि भी स्पष्ट हैं .लेकिन मध्य आकाश और विपरीत आकाश की बात स्पष्ट नहीं हो पायी.क्या गुरु को दक्षिण और बुध को उत्तर में माना जाए ? शुक्र, राहू और केतु कहीं नहीं दर्शाए गए हैं. आसमान को अंशों में बांटने और उन अंशों को राशियों का नाम देने का सिद्धांत तो समझ में आ गया किन्तु प्रयोग के तौर पर चित्र से बात स्पष्ट नहीं हो पायी.
    लेख माला रुचिकर है.

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  9. दी गयी कुण्डली में चन्द्र राशि मकर और सूर्य राशि कर्क तो स्पष्ट है.पूर्व क्षितिज पर गुरु और पश्चिम क्षितिज पर चन्द्र और शनि भी स्पष्ट हैं .लेकिन मध्य आकाश और विपरीत आकाश की बात स्पष्ट नहीं हो पायी.क्या गुरु को दक्षिण और बुध को उत्तर में माना जाए ? शुक्र, राहू और केतु कहीं नहीं दर्शाए गए हैं. आसमान को अंशों में बांटने और उन अंशों को राशियों का नाम देने का सिद्धांत तो समझ में आ गया किन्तु प्रयोग के तौर पर चित्र से बात स्पष्ट नहीं हो पायी.
    लेख माला रुचिकर है.

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  10. बहुत अच्छी जानकारी
    सूर्य राशि - कर्क
    चन्द्र राशि- मकर
    लगना- कर्क

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  11. क्या आप इसे कापी-पेस्ट कर इकठ्ठा करने की अनुमति देंगी.. क्योंकि शायद एक बार पढ़ने से पूरी बात समझ में नहीं आ पायेगी और याद रखने में भी थोड़ी दिक्कत हो सकती है...

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  12. हेम पांडेय जी .. चूंकि पृथ्‍वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूरब की ओर चक्‍कर लगाती है .. इसलिए पूरब से पश्चिम की ओर जा रहा आसमान की चौडी पट्टी को ही 12 भागों में बांटा गया है है .. विपरीत ओर के आसमान कहने का अर्थ है कि यदि बच्‍चे का जन्‍म भारत में हुआ है .. तो भारत की ओर के मध्‍य आकाश में बहस्‍पति तथा अमेरिका की ओर के मध्‍य आकाश में मंगल है .. आशा है आपका भ्रम दूर हो गया होगा !!

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  13. भारतीय नागरिक जी .. मैं ज्‍योतिष के प्रचार प्रसार के लिए ही यह लेख माला शुरू कर रही हूं .. पाठक के ऊपर निर्भर है कि इस लेख का किस रूप में उपयोग करें .. सिर्फ दुरूपयोग नहीं होना चाहिए !!

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  14. बहुत शानदार और ज्ञानवद्र्धक पोस्ट है। दरअसल ज्योतिष के विषय में मेरी जानकारी बिल्कुल शून्य है। आपकी पोस्ट पढ़ी ज्यादा समझ तो नहीं आई पर रोचक जरूर लगी।
    http://udbhavna.blogspot.com/

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  15. अब तक कभी ज्योतिष पर विश्वास नही हुआ........अब आप इतने अच्छे से समझा रही है ...शायद भ्रांतिया जो मन मे बसी है दूर हो.......कुछ हद तक ......अद्भुत जानकारी......बहुत विस्तार से..........आभार

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  16. ज्योतिष विद्या के लिये काफी परिश्रम करना होगा। इच्छा होती है सीखने की। अभी केवल सूर्य राशि व चन्द्र राशि के बारे मे ही समझ मे आया जो कि क्रमश: कर्क व मकर है। यहां पर इसे समझाने के लिये बहुत बहुत शुक्रिया।

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  17. संगीता जी धन्यवाद। आपका यह प्रयास बहुत ही उत्तम है। यह ज्योतिष शास्त्र के अनुरागियों के लिए काफी मददगार साबित होगा। ज्योतिष को नये सशक्त और सार्थक ढंग से लोगों के सामने लाने के लिए आपको बधाई-राजेश त्रिपाठी

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  18. बहुत अच्छी जानकारी॥आभार।

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