Thursday, 24 June 2010

पाश्‍चात्‍य ज्‍योतिषियों के अनुसार सूर्य राशि

पिछले आलेख में लिखी गयी खा‍मी की ओर डॉ महेश सिन्‍हा जी और हेम पांडेय जी ने इशारा किया। वास्‍तव में एक एक तिथि की चर्चा न कर पिछले आलेख में पूरे वर्ष के दौरान मैं मोटे तौर पर सूर्य के प्रत्‍येक राशि में एक एक महीने समझाना था , क्‍यूंकि इन एक दो दिनों के विचलन पर ध्‍यान देने में पाठकों को संकेन्‍द्रण गडबड हो सकता था।

वास्‍तव में सूर्य 15 अप्रैल को मेष राशि में जाकर 14 मई तक वहां रहकर 15 मई से 15 जून तक वृष राशि में होता है। इसी प्रकार 16 जून से 15 जुलाई तक मिथुन में, 16 जुलाई से 16 अगस्‍त तक कर्क में, 17 अगस्‍त से 17 सितंबर सिंह में, 18 सितंबर से 17 अक्‍तूबर कन्‍या में, 18 अक्‍तूबर से 16 नवंबर तुला में, 17 नवंबर से 16 दिसंबर वृश्चिक में, 17 दिसंबर से 14 जनवरी धनु में, 15 जनवरी से 12 फरवरी मकर में, 13 फरवरी से 14 मार्च कुंभ में तथा 15 मार्च से 14 अप्रैल तक मीन राशि में घूमते हुए पुन: 15 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करता है। इसी के आधार पर सूर्यराशि का फैसला किया जा सकता है।
कुछ मासिक पत्रिकाओं में हर महीने की 22 या 23 तारीख को ही सूर्य का राशि परिवर्तन दिखाया जाता है , Aries (21 March-20 April)
Taurus (21 April-21 May)
Gemini (22 May-21 June)
Cancer (22 June-22 July)
Leo (23 July-22 August)
Virgo (23 August-21 September)
Libra (22 September-22 October)
Scorpio (23 October-21 November)
Sagittarius (22 November-21 December)
Capricorn (22 December-20 January)
Aquarius (21 January-19 February)
Pisces (20 February-20 March)
यानि हमारे द्वारा गणना किए जानेवाली तिथि से 24 या 25 दिन पूर्व ही , इसका कारण पाश्‍चात्‍य ज्‍योतिषियों द्वारा आसमान के 0 डिग्री को भारतीय ज्‍योतिषियों से 25 डिग्री पहले मान लिया जाना है। इसके कारण की चर्चा कभी बाद में , पर हमारा मत है कि हमारे ऋषियों द्वारा तय किए गए राशि वर्गीकरण में कोई खामी नहीं है और इसमें किसी प्रकार के तर्क को घुसेडने की कोई जगह नहीं।

11 comments:

  1. मेरी एक लम्बे समय से ज्योतिष के बारे में जानने और थोडा बहुत सीखने की इच्छा हो रही थी. लगता है आपके इस ब्लॉग से वो पूरी अवश्य होगी.

    ReplyDelete
  2. लीजिए यहाँ तो संगीता जी क्लास ले रही हैं !!
    और हम एक दिन देर से आये हैं :-)
    पर कोई बात नहीं कल की पढ़ाई भी कर ही लेंगे.

    ReplyDelete
  3. जिन्दा लोगों की तलाश!
    मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!


    काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
    =0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=

    सच में इस देश को जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

    हमें ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

    इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

    अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

    आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

    सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

    (सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
    राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666

    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

    ReplyDelete
  4. राजीव जी .. आप एक दिन नहीं .. एक सप्‍ताह देर से पहुंचे हैं यहां .. ये आठवीं कडी है !!

    ReplyDelete
  5. फिर गड़बड़!
    सूर्य 15 अप्रैल को मेष राशि में जाकर 14 मई को वहां से निकलकर 15 मई से 15 जून तक वृष राशि में होता है। इसी प्रकार 16 जून से 15 जुलाई तक मिथुन में, 16 जुलाई से 16 अगस्‍त तक कर्क में, 17 अगस्‍त से 17 सितंबर सिंह में, 18 सितंबर से 17 अक्‍तूबर कन्‍या में, 18 अक्‍तूबर से 16 नवंबर तुला में, 17 नवंबर से 16 दिसंबर वृश्चिक में, 17 दिसंबर से 14 जनवरी धनु में, 15 जनवरी से 12 फरवरी मकर में, 13 फरवरी से 14 मार्च कुंभ में तथा 15 मार्च से 14 अप्रैल तक मीन राशि में घूमते हुए पुन: 15 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करता है।

    ये सब गड़बड़ है। सूर्य जिस दिनांक को संक्रांति होती है उसी दिनांक को एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। आप के अनुसार 14 मई को वहां से निकलकर 15 मई से 15 जून तक वृष राशि में होता है। यानी हर माह सूर्य किसी भी राशि में न रह कर अवकाश मनाता है। जरा ये भी बताएँ कि ये अवकाश वह कहाँ मनाता है?

    ReplyDelete
  6. मैं ज्‍योतिष के जानकारों को ज्‍योतिष नहीं सीखा रही हूं .. बिल्‍कुल सामान्‍य लोगों को सिखला रही हूं .. अभी संक्रांति शब्‍द का प्रयोग करने से उन्‍हें अर्थ समझाना होगा !!

    ReplyDelete
  7. नये ब्लॉग पर आपका स्वागत है, बधाई आपको

    ज्योतिष को थोड़ा बहुत पढ़ा था, अब वापिस से सीख रहे हैं।

    वित्तीय स्वतंत्रता पाने के लिये ७ महत्वपूर्ण विशेष बातें [Important things to get financial freedom…]

    ReplyDelete
  8. हमारा भी पुन: सबक याद हो रहा है। धन्यवाद्

    ReplyDelete
  9. अच्छी जानकारी मिल रही है...आभार

    ReplyDelete
  10. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
    जनोक्ति.कॉम www.janokti.com एक ऐसा हिंदी वेब पोर्टल है जो राज और समाज से जुडे विषयों पर जनपक्ष को पाठकों के सामने लाता है . हमारा प्रयास रोजाना 400 नये लोगों तक पहुँच रहा है . रोजाना नये-पुराने पाठकों की संख्या डेढ़ से दो हजार के बीच रहती है . 10 हजार के आस-पास पन्ने पढ़े जाते हैं . आप भी अपने कलम को अपना हथियार बनाइए और शामिल हो जाइए जनोक्ति परिवार में !

    ReplyDelete