Friday, 25 June 2010

जन्‍मकुंडली से तिथि का अनुमान किया जा सकता है !!

ज्‍योतिष जैसे गूढ विषय को सैद्धांतिक रूप में नहीं , यानि किताबी भाषा में नहीं , व्‍यावहारिक तौर पर लेख के द्वारा समझाने का प्रयास करना आसान नहीं, भाषा के हेरफेर से कुछ त्रुटि रह ही जाती है , पिछले पोस्‍ट पर हुई ऐसी ही गलती पर हमारा ध्‍यान दिनेश राय द्विवेदी जी ने आकृष्‍ट किया। निंदक के तौर पर उनकी टिप्‍पणियों के मिलने से आप सबों की जानकारी में अवश्‍य वृद्धि होगी। वैसे उनके द्वारा टिप्‍पणी की गयी भाषा में थोडी तल्‍खी अवश्‍य है, जो किसी के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्‍त होने पर स्‍वाभाविक रूप से आ जाती है, इसलिए इसे इग्‍नोर करना ही मैं उचित समझती हूं।

दरअसल अपने ब्‍लॉग के सामान्‍य पाठकों को अभी पंचांग के बारे में जानकारी देने का मेरा इरादा नहीं था , अभी तक लिखे गए आलेखों में जन्‍मकुंडली को देखकर आसमान की स्थिति , लग्‍न , जन्‍म समय , सूर्यराशि और चंद्रराशि निकालने के बारे में जानकारी देने के बाद इस आलेख के द्वारा मैं तो मात्र यह समझाना चाह रही थी कि किसी जन्‍मकुंडली में सूर्य की स्थिति को देखते हुए आप जन्‍म के महीने का मोटामोटी अंदाजा किस प्रकार लगा सकते हैं , जिस दिन आपलोगों को पंचांग के बारे में जानकारी मिलेगी , बहुत कुछ समझ में आ ही जाएगा।

जैसा कि अबतक हम समझ चुके , सूर्य एक एक महीने प्रत्‍येक राशि में होता है , उस एक महीने के दौरान चंद्रमा सभी राशियों का चक्‍कर लगा लेता है। चंद्रमा को 360 डिग्री की इन बारहों राशियों को पार करने में लगभग 30 दिन लगते हैं , क्‍यूंकि वह ढाई ढाई दिनों तक एक राशि में रहता है। जब जन्‍मकुंडली में सूर्य और चंद्र एक साथ हो , तो वह अमावस्‍या या उसके आसपास का दिन होता है , जबकि जन्‍मकुंडली में सूर्य और चंद्र आमने सामने हो , तो वह पूर्णिमा या उसके आस पास का दिन होता है।

जन्‍मकुंडली में सूर्य से दूर होते हुए चंद्रमा को देखकर आप शुक्‍ल पक्ष की विभिन्‍न तिथियों का अंदाजा लगा सकते हैं। सूर्य से एक खाने बाद रहने वाले चंद्र से तृतीया के आसपास , सूर्य से दो खाने बाद रहने वाले चंद्र से पंचमी के आसपास , सूर्य से तीन खाने बाद रहने वाले चंद्र से अष्‍टमी के असपास , सूर्य से चार खाने बाद रहने वाले चंद्र से दशमी के आसपास , सूर्य से पांच खाने बाद रहने वाले चंद्र से त्रयोदशी के आसपास और सूर्य के सामने रहने वाले चंद्रमा से पूर्णिमा के आसपास की तिथि में बालक का जन्‍म समझा जा सकता है।

इस तरह जन्‍मकुंडली में सूर्य की ओर प्रवृत्‍त होते चंद्रमा को देखकर आप कृष्‍ण पक्ष की विभिन्‍न तिथियों का आकलन कर सकते हैं । सूर्य से पांच खाने पहले रहनेवाले चंद्र से तृतीया के आसपास , सूर्य से चार खाने पहले रहने वाले चंद्र से पंचमी के आसपास , सूर्य से तीन खाने पहले रहने वाले चंद्र से अष्‍टमी के आसपास , सूर्य से दो खाने पहले रहने वाले चंद्र से दशमी के आसपास , सूर्य से एक खाने पहले रहनेवाले चंद्र से त्रयोदशी के आसपास और सूर्य के साथ रहने वाले चंद्र से अमावस्‍या के आसपास की तिथि में बालक का जन्‍म समझा जा सकता है।

9 comments:

  1. उपयोगी जानकारी.

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  2. ज्ञान की बातें देख दिल खुश हो गया. लेकिन क्या ज्योतिष भाग्य बदल सकता है?

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  3. @Voice Of The People
    ज्‍योतिष भाग्‍य नहीं बदल सकता .. सिर्फ सांकेतिक तौर पर भाग्‍य की जानकारी दे सकता है .. ज्‍योतिष के अनुरूप कुछ उपयोगी सलाह दी जा सकती है .. या उसके अनुरूप आप अपने उपाय कर सकते हैं !!

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  4. आप ने मेरी भाषा की तल्खी का उल्लेख किया है। तल्खी है औऱ रहेगी। क्यों कि वैज्ञानिक तथ्यों को विज्ञान की तरह ही रखा जाना चाहिए। उस की एक पद्धति होती है। ज्ञान को प्रस्तुत करने का क्रम होता है। आप उसे उस क्रम से प्रस्तुत ही नहीं कर रही हैं। गणित में सब से पहले गिनती, पहाड़े सिखाए जाते हैं। फिर जोड़,बाकी, गुणा, भाग के कायदे। अब आप सीधे गुणा भाग बताने लगेंगी तो विद्यार्थी की समझ में कुछ न आएगा। सब से पहले आप को पंचांग के बारे में ही बताना चाहिए था। फिर राशियों, नक्षत्रों के बारे में, उस के उपरांत आकाशीय पिंडों और उन की गतियों के बारे में। जब तक आप इन्हें नहीं बताएँगी। आगे की बात समझ नहीं आ सकती।
    आप जो कुछ लिख रही हैं उस में गलत तथ्य बहुत हैं। जैसे 'चंद्रमा को 360 डिग्री की इन बारहों राशियों को पार करने में लगभग 30 दिन लगते हैं'
    आप बिलकुल ठीक ठीक क्यों नहीं बता सकतीं कि 360 डिग्री की यात्रा में चंद्रमा को कितना समय लगता है और सूर्य को कितना?
    वास्तव में आप वैज्ञानिक जानकारी लोगों के सामने नहीं रख रही हैं अपितु जो कुछ आप कर रही हैं उस से कुछ वैज्ञानिक तथ्यों के हवाले से आधार फलित ज्योतिष के वैज्ञानिक होने के पहले से फैला हुआ भ्रम मजबूत हो रहा है।

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  5. मैं आप को दोष नहीं देता। आप की जिस तरह से शिक्षा हुई है उस से आप वास्तव में यही समझती हैं कि फलित ज्योतिष एक वैज्ञानिक विद्या है। मेरे पिताजी, दादाजी आदि भी यही समझते थे और उस पर विश्वास भी करते थे। लेकिन उन की समझ गलत थी। मुझे भी यही समझाया गया था। पर उन की गलती यह थी कि उन्होंने मुझे उस के साथ साथ विद्यालय में विज्ञान पढ़ने भी भेजा। मेरी विज्ञान की पढ़ाई ने उस फलित ज्योतिष की सारी कलई खोलकर रख दी।
    भारतीय ज्योतिष के दो भाग हैं, एक भाग में गणित और खगोल विज्ञान है। वहाँ तक वह विज्ञान है। लेकिन उस के बाद जब उन तथ्यों के आधार पर भविष्यफल निकाला जाना आरंभ किया जाता है तो वह पूर्णतः अवैज्ञानिक हो जाता है। लेकिन इस से आम लोगों में भ्रम पैदा होता है कि फलित ज्योतिष वैज्ञानिक है। लोग इस भ्रम पर विश्वास करने लगते हैं। आप स्वयं भी उसी भ्रम के शिकार आम लोगों में से एक हैं और उस भ्रम का पूरी ईमानदारी से आगे प्रसार भी कर रही हैं।

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  6. @आप जो कुछ लिख रही हैं उस में गलत तथ्य बहुत हैं। जैसे 'चंद्रमा को 360 डिग्री की इन बारहों राशियों को पार करने में लगभग 30 दिन लगते हैं'
    आप बिलकुल ठीक ठीक क्यों नहीं बता सकतीं कि 360 डिग्री की यात्रा में चंद्रमा को कितना समय लगता है और सूर्य को कितना?

    सूर्य की परिक्रमा करते हुए पृथ्‍वी के पथ के अंडाकार होने की वजह से यह घटता बढता रहता है .. इसलिए यह लगभग में ही बताया जा सकता है।


    @वास्तव में आप वैज्ञानिक जानकारी लोगों के सामने नहीं रख रही हैं अपितु जो कुछ आप कर रही हैं उस से कुछ वैज्ञानिक तथ्यों के हवाले से आधार फलित ज्योतिष के वैज्ञानिक होने के पहले से फैला हुआ भ्रम मजबूत हो रहा है।

    फलित ज्‍योतिष विज्ञान था , विज्ञान है, और विज्ञान रहेगा .. इसमें कोई भ्रम नहीं।

    @उन की गलती यह थी कि उन्होंने मुझे उस के साथ साथ विद्यालय में विज्ञान पढ़ने भी भेजा। मेरी विज्ञान की पढ़ाई ने उस फलित ज्योतिष की सारी कलई खोलकर रख दी!

    आप यदि यह समझते हें कि हमलोगों ने विज्ञान की पढाई नहीं की , तो ऐसा नहीं है

    @आप स्वयं भी उसी भ्रम के शिकार आम लोगों में से एक हैं और उस भ्रम का पूरी ईमानदारी से आगे प्रसार भी कर रही हैं

    भ्रम में कौन है .. इसका फैसला दुनिया कर लेगी .. मेरे सारे पाठक विज्ञान को जानने वाले हैं .. मैं भ्रम का प्रसार नहीं कर सकती

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  7. यह भी एक भ्रम है कि आप भ्रम का प्रसार नहीं कर सकतीं।

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  8. Sadhna said
    aap jab gyan de nahi sakte to itne harsh comments bhi na kare jise is vishay me ruchi hogi vo padega jise nahi hogi nahi padega.

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