Monday, 28 June 2010

क्‍या नक्षत्र तारों का समूह होता है ??

सामान्‍य लोग 'नक्षत्र ' शब्‍द को तारे या तारे के समूह के लिए ही प्रयोग करते हैं , पर ज्‍योतिष में 'नक्षत्र' का यह अर्थ नहीं है। आसमान में 30 डिग्री का प्रतिनिधित्‍व करनेवाले राशि की तरह नक्षत्र भी पूरे गोलाकार आसमान के 360 डिग्री को 27 भागों में बांटने से बने 13 डिग्री 20 मिनट की कोणिक दूरी का प्रतिनिधित्‍व करता है। जिस प्रकार एक राशि को पहचानने और उसे याद रखने के लिए उसमें स्थित तारा समूहों को लेकर एक खास आकार दिया गया है , उसी प्रकार नक्षत्रों को पहचानने के लिए भी उसमें स्थित तारा समूहों को याद रखा जाता है , पर नक्षत्र ताराओं का समूह नहीं होता , जैसा कि लोगों के मन में भ्रम है।

आसमान के 12 भागों में बंटवारा कर देने के बाद भी ऋषि मुनियों ने इसके और सूक्ष्‍म अध्‍ययन के लिए इसे 27 भागों में बांटा , जिससे 13 डिग्री 20 मिनट का एक एक नक्षत्र निकला। आकाश में चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा पर चलता हुआ 27.3 दिन में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है, इस तरह चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र को पार करता है। किसी व्‍यक्ति‍ का जन्‍म नक्षत्र वही होता है , जहां उसके जन्‍म के समय चंद्रमा होता है। ऋषि मुनि ने व्‍यक्ति के जन्‍म के नक्षत्र को बहुत महत्‍व दिया था , और इसके अध्‍ययन के लिए हर नक्षत्र के प्रत्‍येक चरण के लिए अलग अलग 'अक्षर' रखे थे। बच्‍चे के नाम में पहला अक्षर नक्षत्र का ही हुआ करता था, जिससे एक नक्षत्र के बच्‍चे को बडे होने के बाद भी अलग किया जा सकता था।  शायद बडे स्‍तर पर रिसर्च के लिए ऋषि मुनियों ने यह परंपरा शुरू की हो।

0 डिग्री से लेकर 360 डिग्री तक सारे नक्षत्रों का नामकरण इस प्रकार किया गया है ..  अश्विनी , भरणी , कृत्तिका , रोहिणी , मॄगशिरा , आद्रा , पुनर्वसु , पुष्य  , अश्लेशा , मघा , पूर्वाफाल्गुनी , उत्तराफाल्गुनी , हस्त  , चित्रा , स्वाती , विशाखा , अनुराधा , ज्येष्ठा , मूल , पूर्वाषाढा , उत्तराषाढा ,  श्रवण , धनिष्ठा , शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद , उत्तराभाद्रपद , रेवती । अधिक सूक्ष्‍म अध्‍ययन के लिए एक एक नक्षत्र को पुन: चार चार चरणों में बांटा गया है। चूंकि राशि बारह हैं , और नक्षत्र 27 , और सबके चार चार चरण। इसलिए एक राशि के अंतर्गत किन्‍ही तीन नक्षत्र के 9 चरण आ जाते हैं । विवाह के समय जन्‍म कुंडली मिलान के लिए वर और वधू के जन्‍म नक्षत्र का ही सबसे अधिक महत्‍व होता है।

आसमान में सूर्य जब इन नक्षत्रों को पार करता रहता है , तो मौसम के लिए इन नक्षत्रों का प्रयोग किया जाता है। चूंकि सूर्य की गति एक डिग्री प्रतिदिन की है , इसलिए एक एक नक्षत्र को पार करने में इसे लगभग 13 दिन ही लगते हैं। लगभग का प्रयोग इसलिए किया जा रहा है , क्‍यूंकि पृथ्‍वी के अंडाकार पथ होने से सारे नक्षत्रों को पार करने में अलग अलग समय लगता है। हर नक्षत्रों से होते हुए सूर्य 22 जून से आर्द्रा में चल रहा है , जो 6 जुलाई से पुनवर्सु में , 20 जुलाई से पुष्‍य में , 3 अगस्‍त से अश्‍लेषा में चलने के बाद 17 अगस्‍त को मघा में प्रवेश के बाद 30 अगस्‍त को पूर्वा फाल्‍गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। मौसम की चर्चा में भी आपने इन नक्षत्रों का नाम अवश्‍य सुना होगा।

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7 comments:

  1. जानकारीपूर्ण आलेख.

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  2. बहुत अच्छा और जानकारीपूर्ण आलेख....

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    www.lekhnee.blogspot.com


    Regards...


    Mahfooz..

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  3. accha laga aapka yah lekh bahut si jaankari mili shukriya

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  4. कृपया अभिजीत नक्षत्र के विषय में जानकारी देने का कष्ट करें.

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  5. बहुत से प्रश्न मन में घुमड़ते हैं ..फिर कभी !

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  6. i want to buy ur books pls suggest how

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