Friday, 9 July 2010

जन्‍मकुंडली में भी अधिकांश समय बुध और शुक्र सूर्य के साथ साथ ही होते हैं !!

पिछले आलेखों में आपको जानकारी मिली थी कि पृथ्‍वी को स्थिर रखने से पूरे आसमान की 360 डिग्री को 12 भागों में बांटकर 12 राशियां बनायी गयी हैं। सूर्य एक एक राशि में एक महीने ठहरते हुए पूरे वर्ष में कुल 12 राशियों का चक्‍कर और चंद्रमा एक एक राशि में ढाई दिनों तक रहते हुए कुल 12 राशियों का चक्‍कर एक माह में लगाता है।

इसी प्रकार अन्‍य ग्रह भी नियमित तौर पर पूरे भचक्र का चक्‍कर लगाते हैं। चूंकि सौरमंडल में मंगल , बृहस्‍पति और शनि जैसे ग्रहों की स्थिति पृथ्‍वी के बाद होते हैं , इसलिए इनका सूर्य की गति से कोई संबंध नहीं होता , यही कारण है कि ये तीनो ग्रह आसमान में कहीं पर भी हो सकते हैं , यही कारण है कि जन्‍मकुंडली में ये 12 खाने में कहीं भी छितराये हो सकते हैं।

पर सौरमंडल में बुध और शुक्र .. ये दो ग्रह ऐसे हैं , जो सूर्य और पृथ्‍वी के मध्‍य स्थित होकर सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं। इस कारण पृथ्‍वी को स्थिर रखते हुए जब सभी ग्रहों की गति का अध्‍ययन होता है , तो वे अधिकांश समय सूर्य के साथ साथ ही देखे जाते हैं। सूर्य से अधिक निकट होने के कारण बुध सूर्य से अधिकतम 27 डिग्री की दूरी पर हो सकता है , जबकि शुक्र सूर्य से अधिकतम 47 डिग्री की दूरी पर होता है।

यही कारण है कि जन्‍मकुंडली में भी अधिकांश समय बुध और शुक्र सूर्य के साथ साथ ही होते हैं। किसी भी जन्‍मकुंडली में बुध सूर्य के साथ या उससे अगले खाने में हो सकता है , जबकि शुक्र सूर्य के साथ या उससे अधिकतम दो खाने आगे तक रह सकता है। इस प्रकार जिस महीने में सूर्य जिस राशि में होता है , बुध और शुक्र भी उसी राशि के आसपास होते हैं।

2 comments:

  1. जानकारी का आभार.

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  2. अच्छी जानकारी. पंचांग देख कर जांच भी लिया. धन्यवाद.

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