Monday, 19 July 2010

एक जन्‍मकुंडली को देखकर हम जातक के बारे में क्‍या क्‍या कह सकते हैं ??

किसी के जन्‍मांग चक्र या जन्‍मकुंडली को देखने से हमें जातक के बारे में बहुत जानकारियां मिल जाती है , ये रही एक व्‍यक्ति की जन्‍मकुंडली ...
  1. जन्‍मुकंडली में सबसे ऊपर मौजूद अंक हमें जातक के लग्‍न की जानकारी देता है , इस कुंडली में 5 अंक सिंह राशि का सूचक है , इसलिए जन्‍म लग्‍न सिंह हुआ , इसका अर्थ यह है कि जातक का जन्‍म उस वक्‍त हुआ , जब आसमान में 120 डिग्री से 150 डिग्री का उदय हो रहा था , जो भचक्र की पांचवी राशि है।
  2. चंद्रमा 9 अंक में मौजूद है , इसलिए चंद्रराशि धनु हुई।
  3. सूर्य 1 अंक में मौजूद है , इसलिए सूर्य राशि मेष हुई।
  4. सूर्य 1 अंक में है , इसका अर्थ यह भी है कि जातक का जन्‍म 15 अप्रैल से 15 मई के मध्‍य हुआ है। 
  5. लग्‍न से चौथे खाने में मौजूद सूर्य से हमें यह जानकारी मिल रही है कि जातक का जन्‍म दोपहर बाद लगभग दो तीन बजे हुआ होगा।
  6. सूर्य से पहले चंद्र की स्थिति होने से हमें जानकारी मिल रही है कि जातक का जन्‍म कृष्‍ण पक्ष में हुआ है। 
  7. सूर्य से चार खाने चंद्रमा की स्थिति से मालूम हो रहा है कि जातक का जनम षष्‍ठी के आसपास का है।
  8. अभी शनि कन्‍या राशि में यानि 6 अंक में चल रहा है , जबकि जन्‍मकुंडली में 12 अंक में शनि है। इसका अर्थ यह है कि शनि ने अपना आधा या डेढ या ढाई या साढे तीन चक्र पूरा किया है। इस हिसाब से जातक का जन्‍म लगभग 15 वर्ष या 45 वर्ष या 75 वर्ष पहले हुआ होगा।
  9. अभी बृहस्‍पति मीन राशि में यानि 12 अंक में चल रहा है , जबकि जन्‍मकुंडली में बृहस्‍पति 4 अंक में है। इसका अर्थ यह है कि जातक का जन्‍म लगभग 8 या 20 या 32 या 44 या 56 या 68 या 80 वर्ष पहले हुआ है। 
  10. शनि और बृहस्‍पति दोनो की संभावना 44 के आसपास बनती है , इस हिसाब से जातक की उम्र 44 के आसपास होने का पता चल जाता है।
इसी प्रकार बिना पंचांग के ही अन्‍य जन्‍मकुंडली से भी जातक के बारे में ये दसों जानकारियां प्राप्‍त की जा सकती हैं , इसके लिए सभी पुराने आलेख पढें !!

8 comments:

  1. बहुत अच्छी और जानकारीपूर्ण पोस्ट...

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  2. आभार जानकारी का!

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  3. अच्छी जानकारी। पर इस जातक का जन्म 14 अप्रेल का भी हो सकता है। फिर उम्र के लिए जन्मकुंडली की क्या जरूरत जब कि वह जन्मतिथि से ही पता लग सकती है।

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  4. दिनेशराय द्विवेदी जी,
    कभी कभी बहुतों को जन्‍म के बारे में कोई जानकारी नहीं होती .. जबकि उनकी ये कुंडली सुरक्षित होती है .. और यदि जन्‍म तिथि हो भी तो एक छोटी सी जन्‍मकुंडली से जातक के जन्‍म के समय की इतनी जानकारी मिल जाना मामली बात नहीं .. इन नियमों के बारे में बहुत सारे ज्‍योतिषी को जानकारी नहीं होती .. इन नियमों से एक फायदा यह भी है कि हम जन्‍मतिथि से कुंडली को क्रॉसचेक भी कर सकते हैं !!

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  5. yah to kundali ki reverse engineering ho gayi

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  6. आप बहुत ही अच्छे तरीके से ज्योतिष कि मुलभुत जानकारी हम जैसे जिज्ञासुओं को दे रही हैं. आपका बहुत बहुत धन्यवाद. मैं आपका प्रत्येक लेख अपने कंप्यूटर पर सुरक्षित करता जा रहा हूँ. एकबार फिर धन्यवाद.

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  7. अत्यंत महत्वपूर्ण और बोधगम्य जानकारी हेतु आभार.

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  8. यह प्रथम बिंदु मालूम पड़ा जहां गत्यात्मक ज्योतिष परम्परागत ज्योतिष से भिन्न है.इसका अर्थ यह हुआ कि कालसर्प योग जैसा कोई योग नहीं है, क्योंकि राहू और केतु के एक ही ओर सारे ग्रहों का जमावड़ा ही कालसर्प योग कहलाता है.
    (संदर्भित पोस्ट के नीचे टिपण्णी करने की सुविधा न मिलने के कारण यह टिपण्णी यहाँ कर रहा हूँ.)

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