Saturday, 6 August 2011

कमजोर चंद्रमा : असाधारण व्‍यक्तित्‍व

पिछले आलेख में मैने बताया कि 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' में सूर्य से 40 डिग्री की दूरी तक के चांद को कमजोर कहा जाता है , यह मन का प्रतीक ग्रह है , इसलिए इसके कमजोर होने से व्‍यक्ति बाल्‍यावस्‍था के वातावरण में या पालन पोषण में किसी प्रकार की कमी को मन ही मन महसूस करता है । इस कमजोरी को दूर करने के लिए असाधारण कार्य करना चाहता है। यदि अन्‍य ग्रह इसका साथ दें तो वह इस असाधारण कार्य का फल प्राप्‍त करके असाधारण व्‍यक्तित्‍व का स्‍वामी बन जाता है। इस प्रकार किसी के व्‍यक्तित्‍व निर्माण में छोटे चंद्रमा की भी भूमिका होती है। इसलिए कमजोर चंद्रमा के कारण बच्‍चे का व्‍यवहार कुछ असामान्‍य हो , तो अधिक चिंता करने की आवश्‍यकता नहीं। नीचे के उदाहरण से इस बात को स्‍पष्‍ट किया जा सकता है ......

झांसी की महारानी लख्मीबाई का जन्म संवत्1891 में कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष कह चतुर्दशी तिथि को तुला लग्न में हुआ था। इनका चंद्रमा दशम भावाधिपति कमजोर होकर लग्न में स्थित है , इसलिए उन्होनें बाल्यावस्था में शरीर और पिता के सुख में कमी का अहसास किया और इसकी क्षतिपूर्ति के लिए ऐसा असाधारण कार्य कर बैठी कि पूरी दुनिया उनके व्यक्तित्व का लोहा मानती है और प्रतिष्ठा देती है।

महात्मा गांधी का जन्म 02.10.1869 को तुला लग्न में ही हुआ था , चंद्रमा दशम भावाधिपति एकादश भाव में स्थित है , इस कारण बचपन में लाभ और प्रतिष्ठा की कमी महसूस की आर ऐसा असाधारण कार्य कर डाला कि पूरी दुनिया इनके लाभ प्राप्ति के तरीके की इज्जत करती है।

पं रविन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 07.05.1861 में मीन लग्न में हुआ था , कमजोर चंद्रमा बुद्धि का अधिपति लग्न में स्थित है , इसलिए बाल्यावस्था की शारीरिक और बौद्धिक कमजोरी को दूर करने के लिए बाद में असाधारण पुस्तकें लिखकर असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी बन गए।

हैदर अली शाह ने दिसम्बर 1772 में तुला लग्न और वृश्चिक राशि में जन्म लिया था , यानि कमजोर चंद्रमा दशम भावाधिपति द्वितीय भाव में स्थित था। इन्होनें बाल्यावस्था में पिता , प्रतिष्ठा और धन तीनों की कमी को महसूस किया और बाद के जीवन में तीनों को ही मजबूती दे सकें।

श्री आदि शंकराचार्य ने कर्क लग्न में जन्म लिया था , इनका लग्नाधिपति कमजोर चंद्रमा लाभ स्थान में स्थित था , जिसके कारण बाल्यावस्था में शारीरिक कष्ट और लाभ की कमी को महसूस किया और बाद में शरीर लाभ का असाधारण कार्य कर बैठे।

स्वर्गीय देवकी नारायण खत्रीजी का जन्म संवत् 1924 पौष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मिथुन लग्न में हुआ था , द्वितीय भावाधिपति चंद्रमा कमजोर होकर षष्ठ भाव में स्थित है, जिसके कारण इन्होनें बाल्यावस्था में झंझटों , पेचीदगियों जैसी समस्याओं के कारण आर्थिक कमजोरी महसूस की और बाद में अनेक जासूसी और तिलिस्मी उपन्यास लिखे , जिनसे उन्हें आर्थिक लाभ हुआ।

रामकृष्ण परमहंसजी का जन्म 18.02.1836 को कुंभ लग्न में हुआ था , इनका षष्ठ भावाधिपति चंद्रमा कमजोर होकर लग्न में स्थित है , जिसके कारण बाल्यावस्था में इन्होनें शारीरिक और अन्य जटिलताओं को महसूस किया और बाद में मोक्ष की प्राप्ति हेतु असाधारण कार्य कर बैठे।

मथुरा के प्रसिद्ध सुख संचारक कंपनी के मालिक पं क्षेत्रपाल शर्माजी ने कुंभ लग्न और मकर राशि के अंतर्गत जन्म लिया था , षष्ठ भावाधिपति चंद्रमा द्वादश भाव में स्थित था , जिसके कारण बाल्यावस्था में रोगों की उपस्थिति और क्रयशक्ति की कमजोरी का अनुभव किया और बाद में विश्व स्तर पर लोकप्रिय होनेवाली असाधारण दवाइयां निकाली।

भगवान रजनीश का जन्म 11.12.1931 को कुंभ लग्न में हुआ था , इनका भी षष्ठ भावाधिपति चंद्रमा एकादश भाव में स्थित है , इस कारण बाल्यावस्था में अनेक प्रकार के झंझटों के कारण लाभप्राप्ति के लिए अपने को कमजोर पाया और बाद में लाभप्राप्ति के अनोखे मार्ग को चुना तथा असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी बनें।

फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन का जन्म 10.10.1942 को मीन लग्न मे हुआ था , पंचम भावाधिपति चंद्रमा कमजोर होकर अष्टम भाव में स्थित है , जिसके कारण बाल्यावस्था में बौद्धिक और जीवनशैली की कमजोरी महसूस की और उसे दूर करने के लिए असाधारण कार्य कर असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी बनें।

स्‍व राजीव गांधी का चंद्रमा द्वादश भावाधिपति कमजोर होकर लग्‍न में स्थित है। इन्‍होने बाल्‍य काल में शारीरिक मामलों , बाहरी संदर्भों और आत्‍मविश्‍वास की कमी को महसूस किया औ उसे दूर करने के लिए असाधारण कार्य कर असाधारण व्‍यक्तित्‍व के मालिक बनें।

वास्‍तव में चंद्रमा कमजोर रहने से व्‍यक्ति में धैर्य , सहनशीलता , आदि गुणों की प्रचुरता रहती है , जो आगे बढने में सहायता प्रदान करती है। यदि अन्‍य ग्रहों का अच्‍छा प्रभाव हो , तो व्‍यक्ति असाधारण कार्य कर बैठता  है।

13 comments:

  1. behad upyogi jaankari,,,kisi kathin bishay bastu ko praambh karane ke liye sabse pahle rujhan aaur astah ki jarurat hoti hai aapka yah prayas mujhe behad pasand aaya,,,shubhkamnaon ke sath

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  2. आदरणीय संगीता जी नमस्कार्। पहली बार आपको पढा फेसबुक के अभिव्यक्ति में देखा था । अच्छी ज्योतिष जानकारी दे रही हैं आप तो धन्यवाद।

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  3. आदरणीय संगीता जी नमस्का। छोटे उम्र से ही ज्योतिष में रूचि है पर आज तक सीखने का सौभाग्य नही मिला। क्या तारीख सही न हो तो भी कुन्ड्ली बनायी जा सकती है। सही गणना भी की जा सकती है। क्या बेटे की सही कुन्ड्ली से मां के बारे में सब कुछ जाना जा सकता है।

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  4. कमजोर चंद्रमा इतना बढिया होता है तब तो सशक्त चंद्रमा उलटा कराता होगा । मै पीछे के लेख पढ कर देखती हूँ अवश्य आपने कुछ लिखा होगा ।
    बढिया जानकारी ।

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  5. कमजोर चंद्रमा इतना बढिया काम करवा सकता है तब सशक्त चंद्रमा ?

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  6. आपको गोवर्धन व अन्नकूट पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएं,

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  7. mujhe yaad hai ki mere vishay me bhi aapne yahi bataya tha...kamjor chnadrama ne bachpan me to bahut se dukh dikhaye...ab kuchh asaadharan kar paungi ya nahi ye to bhavishya hi jane

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  8. रोचक जानकारी दी है आपनें, पर नई पोस्ट काफी दिनों से नहीं लगाई है। कृपया निरंतरता बनाए रखें।

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  9. कमजोर चन्द्रमा इतने अद्भुत कार्य करवाता है , आँखें खोल दी आपने!

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  10. शुक्रिया संगीता जी हौसला बढ़ाने का ...मेरा भी चंद्रमा कमजोर ही है जो की अब अच्छा फल दे रहा है ........अच्छी जानकारी के लिए शुक्रिया

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  11. कमाल का विश्लेषण है।

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